Thursday, November 29, 2018

11/29/2018 10:10:00 PM

RSCIT Book Lesson- 4. (Introduction of Internet "इंटरनेट का परिचय") Notes In Hindi 2019.

RSCIT Book Lesson- 4. (Introduction of Internet "इंटरनेट का परिचय") Notes In Hindi 2019.  :- We Are Share Notes of RSCIT Official Book Lesson No. 4. In Hindi Language, So Read and Get High Marks In RSCIT Exam.

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RSCIT Book Lesson- 4. (Introduction of Internet "इंटरनेट का परिचय") Notes In Hindi 2019. 
इस अध्याय के अंदर इंटरनेट की पूरी जानकारी लेंगे हम पढ़ेंगे - इंटरनेट कैसे चलता है, इंटरनेट के लिए कौन कौन से उपकरण चाहिए, इसी के साथ साथ हम वेब ब्राउजर, सर्च इंजन, ईमेल आदि के बारे में पढ़ेंगे।

नोट :- अगर आप इस RSCIT Notes को वीडियो के माध्यम से समझना चाहते हैं, तो हमने इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में आपके लिए एक अच्छा सा वीडियो भी जोड़ा है। तो अगर आपको वीडियो देख कर पढ़ना आसान लगता है, तो कृपया करके आप वीडियो को इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में जाकर देख सकते हैं।


➧ इंटरनेट का परिचय (Introduction to Internet) :- 
इंटरनेट "सूचना का सुपर हाईवे" के नाम से प्रसिद्ध है। इंटरनेट के द्वारा वर्तमान में हम बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जैसे- राजनीति बहस, ऑनलाइन बुक पढ़ना, यूट्यूब पर वीडियो देखना और भी बहुत सारे ऐसे काम है, जो हम अपने घर बैठे कर सकते हैं इंटरनेट के माध्यम से।

इंटरनेट को मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टेबलेट आदी में बहुत ही आसानी से चला सकते हो।

क्लाइंट- जो कंप्यूटर सूचना प्राप्त कर रहा है, वह क्लाइंट होता है।
सर्वर- जो कंप्यूटर सूचना भेज रहा है वह सर्वर कहलाता है।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर- जो कंपनियां इंटरनेट प्रदान करती है, सर्विस प्रोवाइडर कहलाती हैं।

➧ इंटरनेट को एक्सेस कैसे करें : -
इंटरनेट एक्सेस करने के लिए आपके पास कंप्यूटर या मोबाइल होना चाहिए। इसके साथ-साथ कंप्यूटर के अंदर कोई वेब ब्राउज़र और अगर आपके पास डेस्कटॉप कंप्यूटर है तो मॉडेम की आवश्यकता होगी और इंटरनेट कनेक्शन भी आपके पास होना चाहिए।

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) :
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यह वह कंपनियां होती हैं जो इंटरनेट के साथ साथ हमें और भी सुविधाएं प्रदान करती हैं।  जैसे डोमेन नेम सिस्टम, वेब होस्टिंग आदि।

मॉडेम: इसका पूरा नाम मॉडरेशन डिमोलिशन (Moderation Demolition) या Modulator-Demodulator होता है। एक मॉडेम का काम डिजिटल इन्फॉर्मेशन को एनालॉग और एनालॉग इंफॉर्मेशन को डिजिटल में परिवर्तित करना होता है।

मॉडेम के भी कई प्रकार होते हैं-
➤ इंटरनल मॉडेम (आंतरिक मॉडेम) -
यह मॉडेम हमारे डेस्कटॉप या लैपटॉप में इंस्टॉल होता है। यह मॉडेम एक्सटर्नल मॉडेम से सस्ते होते हैं। और इनके लिए अलग से पावर सप्लाई और चैसी की आवश्यकता नहीं होती।

आंतरिक को दो भागों में बांटा गया है-
डायल अप (Dial-Up) - एक टेलीफोन केबल पर काम करता है। इसे टेलीफोन नंबर की आवश्यकता होती है और कनेक्शन स्थापित करने के लिए लॉग इन करना पड़ता है।
वाईफाई (WI-Fi) - वाईफाई नेटवर्क बिना किसी लॉगइन के एक्सेस होता है।

➤ एक्सटर्नल मॉडेम (बाहरी मॉडेम) - इनको सेट-अप करना काफी आसान होता है। यह टेलीफोन लाइन से जुड़ी होती हैं। और इन के लिए अलग से बिजली की आवश्यकता होती है। और अगर इनका इंटरनेट कनेक्शन रोकना चाहे तो मॉडेम को अलग से बंद कर सकते हैं।
इस मॉडेम के उदाहरण डी.एस.एल मॉडेम और ब्रॉडबैंड कनेक्शन है।

➤ पीसी कार्ड मॉडेम - यह मॉडेम पोर्टेबल कंप्यूटर के लिए बनाया गया है। यह एक क्रेडिट कार्ड के आकार का होता है। नोटबुक और हैंडहेल्ड कंप्यूटर पर पीसी कार्ड स्लॉट में इसे हम आसानी से लगा सकते हैं। जब इसकी आवश्यकता नहीं होती तो हम इसे हटा भी सकते हैं। इनमें टेलिफोन केबल के अलावा और किसी केबल की आवश्यकता नहीं होती।

➧ इंटरनेट कनेक्टिविटी के प्रकार :-
 कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए बहुत सारे माध्यम हम यूज कर सकते हैं।

⏩ डायल-अप (Dial Up) : यह सबसे धीमी गति का इंटरनेट कनेक्शन है, जो कि आजकल अप्रचलित है। इस को एक फोन कॉल की तरह नंबर डायल करके इंटरनेट से जोड़ा जाता है, और जब हम वेब सर्फिंग नहीं करेंगे तो यह अपने आप डिस्कनेक्ट हो जाएगा।

⏩ ब्रॉडबैंड (Broadband) : यह हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन आमतौर पर टेलीफोन कंपनियों द्वारा प्रदान किया जाता है। ब्रॉडबैंड शब्द - ब्रॉड बैंडविड्थ से बना है। यह काफी तेज होता है। इसके कारण हम कंप्यूटर पर वॉइस कॉल, ऑडियो और वीडियो स्ट्रीमिंग की अच्छी गुणवत्ता का फायदा उठा सकते हैं। ब्रॉडबैंड की गति को सामान्यतः मेगाबाइट प्रति सेकंड (Mbps-Megabits per Second) में मापा जाता है।

⏩ वाईफाई (Wi-Fi) : इसका पूरा नाम वायरलेस फिडेलिटी (Wireless Fidelity) होता है। और यह WLAN यानी कि Wireless लोकल एरिया नेटवर्क में यूज होता है। यह कनेक्शन रेडियो फ्रिकवेंसी के द्वारा होता है। इसका उपयोग पर्सनल कंप्यूटर, वीडियो गेम, स्माटफोन, डिजिटल कैमरा, टेबलेट कंप्यूटर आदि में किया जाता है। लगभग 20 मीटर ( 66 फीट ) की दूरी तक इसकी रेंज रहती है। और जहां दीवारें होती हैं वहां पर इसका दायरा कम हो जाता है क्योंकि दीवारें रेडियो तरंगों को ब्लॉक कर देती है उनको आगे नहीं बढ़ने देती।

⏩ डी एस एल (DSL) : पूरा नाम डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन होता हैं। यह डायल-अप कनेक्शन से तेज होता है। फोन लाइन के माध्यम से यह कनेक्ट होता है। इसके लिए लैंडलाइन की आवश्यकता नहीं होती। और डायल -अप के विपरीत यह एक बार कनेक्ट होने की बाद में हमेशा कनेक्ट रहता है। इसके साथ फोन लाइन भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

⏩ केबल (Cable) : केबल सेवा, केबल टीवी के माध्यम से इंटरनेट से कनेक्ट करती है। इसके लिए केबल टीवी होने की जरूरत नहीं है। यह एक ब्रॉडबैंड कनेक्शन का उपयोग करता है। Dial-up और DSL सेवा की तुलना में यह तेज होता है, परंतु यह उन्हीं स्थानों पर उपलब्ध हो सकता है जहां पर केबल टीवी होता है।

⏩ उपग्रह (Satellite) : यह कनेक्शन ब्रॉडबैंड का उपयोग करता है, लेकिन इसके लिए केबल या फोन लाइनों की आवश्यकता नहीं होती। पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रह के माध्यम से यह हमें इंटरनेट से जोड़ता है। जिसके कारण दुनिया में कहीं भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। परंतु मौसम खराब होना इसके लिए हानिकारक होता है। एक उपग्रह कनेक्शन थोड़ी देरी से डाटा संचार करता है। इसलिए यह रियल टाइम एप्लीकेशन के साथ वर्क नहीं कर सकता। जैसे- गेमिंग या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि के साथ काम करना थोड़ा कठिन है।

⏩ मोबाइल (Mobile) : मोबाइल के माध्यम से भी हम इंटरनेट से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में सर्विस प्रोवाइडर हमें 3G 4G इंटरनेट कनेक्शन प्रदान कर रहे हैं। इसे हम कहीं पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। (जहां पर इंटरनेट कनेक्शन हो)

➧ इंट्रानेट (Intranet) :
एक निजी नेटवर्क होता है, यह उसी संगठन के कर्मचारियों के लिए होता है जिसके लिए इसे बनाया जाता है। एक आम इंटरनेट यूज करने वाला व्यक्ति इंट्रानेट का यूज नहीं कर सकता क्योंकि इंट्रानेट किसी बड़ी कंपनी का एक अलग से नेटवर्क होता है।

➤ इंटरनेट बनाम इंट्रानेट :
इंटरनेट ग्लोबल वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) है, जबकि इंट्रानेट एक निजी कंपनी का इंटरनेट हैं ,जिसे सिर्फ कंपनी के अंदर इस्तेमाल किया जा सकता है। जिसके लिए इसे बनाया जाता हैं।
इन दोनों के अंदर TCP/IP (Transmission Control Protocol / Internet Protocol) प्रोटोकोल का उपयोग होता है। दोनों के द्वारा एक जैसा काम किया जाता है। और  एक इंट्रानेट यूजर, इंटरनेट एक्सेस कर सकता है परंतु एक इंटरनेट यूजर इंट्रानेट नहीं एक्सेस कर सकता क्योंकि इंट्रानेट में फायरवॉल सिक्योरिटी होती है। जो कि किसी आम व्यक्ति को उसे एक्सेस करने से रोकती है।


➧ वेबसाइट (Website) : 
वेबसाइट पर वेब पेज होते हैं। इंटरनेट पर बनाई गई वेबसाइट में बहुत सारे वेब पेज होते हैं, जो कि एक दूसरे पेज से हाइपरलिंक के द्वारा लिंक होते हैं, वेबसाइट किसी निजी व्यक्ति या फिर एक बड़ी कंपनी की भी हो सकती है। और वेबसाइट के मुख्य पेज को होमपेज के नाम से जाना जाता है। बहुत सारी वेबसाइट एक दूसरी वेबसाइट से हाइपरलिंक के माध्यम से जुड़ी हो सकती हैं।
और वेबसाइट को एक कंप्यूटर सिस्टम पर होस्ट किया जाता है। जिसे सर्वर कहा जाता है। इसे HTTP Server भी कहा जा सकता है।

वेबसाइट दो प्रकार की होती हैं -
स्टैटिक वेबसाइट - स्टैटिक वेबसाइट में जानकारी स्थिर होती है। यूजर उस में कुछ बदलाव नहीं कर सकता।  डायनेमिक वेबसाइट - डायनेमिक वेबसाइट एक समुदाय का हिस्सा होती है। इसमें किसी भी यूजर के द्वारा बदलाव किया जा सकता है।

➧ URL- Uniform Resource Locator : यह एक वेब संसाधन का सन्दर्भ हैं। यह वेबसाइट, फाइल या दस्तावेज का सामान्य प्रारूप में इंटरनेट पता होता है।
एक यू.आर.एल. में क्या क्या होता हैं - नीचे दी गई चित्र को ध्यान से देखें -

➧ Top Level Domain - सभी वेबसाइट अंत में .com, .in, .org. .govt आदि नेम होते हैं, जिनके कारण हमें समझने में आसानी होती है कि यह वेबसाइट कौन से क्षेत्र की है।
नीचे टेबल में कुछ उदाहरण दिए गए हैं उनको देखिए -

➧ DNS - Domain Name System
➧ IP Address - इंटरनेट पर हमारी डिवाइस की पहचान आईपी एड्रेस से होती हैं। इसका उदाहरण - 198.105.232.4



➤ वेब ब्राउजर : 
वेब ब्राउजर एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन होती है। जो कि WWW (वर्ल्ड वाइड वेब) पर कंटेंट को लोकेट करने, प्रदर्शित करने में इस्तेमाल होती है। जैसे इमेज, वेब पेज, वीडियो कंटेंट आदि को प्रदर्शित कर सकता है। ब्राउज़र एक क्लाइंट की तरह काम करता है।

हम जो सर्च करते हैं, वह हमें ब्राउज़र प्रदान करता है ब्राउज़र में बहुत सारे एलिमेंट होते हैं-

बैकवर्ड और फोरवोर्ड बटन - यह बटन पीछे और आगे जाने के लिए इस्तेमाल होता है।
रिफ्रेश बटन - यह वर्तमान के पेज को दोबारा लोड करता है।
न्यू टैब - बहुत सारी वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए होता हैं (Ctrl+T)
स्टॉप बटन - रीलोड हो रहे पेज को रोकता है।
होम बटन - यूजर को मुख्य पृष्ठ पर लेकर जाता है।
एड्रेस बार - यहां पर यू.आर.एल. दिखाई देता है। ऐसे सर्च बार भी बोल सकते हैं।
स्टेटस बार - जो संसाधन या पेज को लोड करने की प्रगति दर्शाती है, व साथ में जूमिन बटन भी होते हैं
व्यू पोर्ट - ब्राउज़र में वेब पेज शो करने के लिए एक क्षेत्र होता है जिसे व्यू पोर्ट के नाम से जाना जाता है।

अधिकतर ब्राउज़र एच.टी.टी.पी. सिक्योर को स्पॉट करते हैं।

एच.टी.टी.पी.एस. (Hyper Text Transfer Protocol Secure) यह एक प्रोटोकोल होता है। इसमें कनेक्शन ट्रांसपोर्ट लेयर (CTL) और या सिक्योर सॉकेट लेयर (SSL) द्वारा हमारी जानकारी को गोपनीय रखा जाता है।

दो लोकप्रिय ब्राउजर है - माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर और माइक्रोसॉफ्ट एज इसके अलावा गूगल क्रोम, फायरफॉक्स, एप्पल सफारी और ओपेरा भी काफी पॉपुलर है।

➧ वेब सर्च करना - इसके माध्यम से हम बहुत सारी सूचना प्राप्त कर सकते हैं। पर कभी कभी गलत सूचनाएं भी प्राप्त हो जाती हैं।

 सर्च इंजन - वेब सर्च ,एक सर्च इंजन के माध्यम से ही संभव होता है। सर्च इंजन वह सॉफ्टवेयर है। जो वर्ल्ड वाइड वेब से संबंधित सूचनाओं को खोजने के लिए बनाया गया है। सर्च रिजल्ट समान्यता: परिणामों की एक सूची के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। एक वेब पेज चित्र, फाइलें, वीडियो आदि का मिश्रण होता है।

सर्च इंजन भी भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं - जैसे गूगल, याहू, बिंग, आस्क ,बायडू (यह चाइना का सर्च इंजन है) इत्यादि।

एक सर्च इंजन वास्तविक समय में निम्नलिखित प्रक्रियाओं को संभालता है -

1. वेब क्रॉलिंग / वेब स्पाइडर - जिन वेबसाइट पर अच्छा डेटा उपलब्ध होता हैं उनको उपयोगकर्ता तक पहुंचते हैं
2. इंडेक्सिंग - इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइट होती हैं। इंटरनेट पर भी वेबसाइट इंडेक्स होती हैं जिनमे अच्छी जानकारी होती हैं।
3. सर्चिंग - जो हम सर्च करते है। सर्च इंजन हमे अच्छे प्रणाम देता हैं।

सबसे ज्यादा लोकप्रिय सर्च इंजन गूगल, बिंग, याहू, हैं। 

गूगल सर्च जिसे सामान्यतः गूगल वेब सर्च या गूगल कहकर संबोधित किया जा सकता है यह एक वेब सर्च इंजन है जो कि वर्ल्ड वाइड वेब पर हमारे द्वारा दी गई सूचना प्राप्त की रिक्वेस्ट को मानता है और हमें सूचना अर्थात परिणाम खोज कर देता है ऐसे ही बिंग, याहू भी वेब सर्च के काम में आते हैं।


➧ विकीपीडिया - यह एक मुक्त विश्वकोश है। इस वेबसाइट पर बहुत सारे लेख लिखे जा चुके हैं, जो कि उपयोगकर्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं दोस्तों आपको बता दें कुछ लोग प्रति घंटे हजारों परिवर्तन लगातार विकिपीडिया में करके इसे सुधार रहे हैं। इसमें वर्तमान में किए गए परिवर्तन और इतिहास में किए गए परिवर्तन के रिकॉर्ड भी आप देख सकते हैं।

➧ ईमेल : ईमेल का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक मेल होता है और आमतौर पर 1993 में यह शुरू हुआ। मैसेज को डिजिटल फॉर्म में एक लेखक से दूसरे या एक से अधिक प्राप्तकर्ताओं तक पहुंचाने का एक तरीका है।
ई-मेल में प्राप्तकर्ता और उपयोगकर्ता को एक ही समय ऑनलाइन रहने की आवश्यकता नहीं होती।

ईमेल मैसेज के 3 भाग होते हैं - एनवलप, संदेश हैडर, मेसेज बॉडी।

लोकप्रिय ईमेल प्लेटफॉर्म में जीमेल, हॉटमेल, याहू मेल, आउटलुक, एवं कई अन्य शामिल है।

किसी ईमेल पते का सामान्य प्रारूप निम्न प्रकार से होता है - abcde@domain और अगर एक विशिष्ट ईमेल है तो उसका उदाहरण निम्न है -abcde@example.org

 ईमेल ऐड्रेस के 2 भाग होते हैं - @ सिंबल से पहले का भाग मेल बॉक्स यानी उपयोगकर्ता का नाम होता है और @ सिंबल के बाद का भाग डोमेन का नेम होता है।

➧ ई-मेल को एक्सेस करना :
सर्वप्रथम ईमेल लिखने के लिए कंपोज ऑप्शन पर क्लिक करना पड़ता है।

CC (Carbon copy) - भेजे गए सभी प्राप्त कर्ताओं को एक दूसरे की जानकारी जैसे - ईमेल एड्रेस आदि दिखाई देती है।
BCC (Blind carbon copy) - भेजे गए सभी प्राप्त कर्ताओं में से किसी को भी एक दूसरे की जानकारी शो नहीं होती।

अटैचमेंट - ईमेल में हम अटैचमेंट करके कोई भी डॉक्यूमेंट भेज सकते हैं या फिर कोई सॉफ्टवेयर, वीडियो, ऑडियो भी यह हो सकता है। पर दोस्तों इसके अंदर अटैचमेंट की सीमा होती है- केवल 25 एमबी  में अटैचमेंट करके भेज सकते हैं अगर आप इससे ज्यादा बड़ी फाइल को शेयर करना चाहते हैं तो आप गूगल ड्राइव का उपयोग कर सकते हैं वहां पर बहुत ही आसानी से हम डॉक्यूमेंट या फिर 25mb से बड़ी फाइल को शेयर कर सकते हैं।

➧ उपयोगी वेबसाइट (राजस्थान में) : राजस्थान सरकार के द्वारा बहुत सारी गवर्नमेंट वेबसाइट हमें प्रदान की गई है जहां से हम बहुत ही अच्छी अच्छी जानकारी ले सकते हैं।

राज्य पोर्टल, राजस्थान सरकार -
यह राज्य सरकार की प्रमुख वेबसाइट है। इस वेबसाइट के द्वारा हम बहुत सारी और भी गवर्नमेंट वेबसाइट पर जा सकते हैं। मुख्य वेबसाइट होने के कारण बाकी गवर्नमेंट की वेबसाइट इस वेबसाइट से लिंक है।
website URL- https://rajasthan.gov.in 

आवेदन भरने के लिए आर.पी.एस.सी. वेबसाइट -
यह राजस्थान लोक सेवा आयोग की वेबसाइट है। और सभी नागरिक सेवाओं हेतु रिक्त पदों पर ऑनलाइन आवेदन भरने के लिए, आवेदन की स्थिति ट्रैक करने के लिए, और समय पर परिणाम प्राप्त करने जैसे सभी कार्य इस वेबसाइट द्वारा किए जाते हैं।
इस वेबसाइट पर जाने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं -
Website URL- https://rpsc.rajasthan.gov.in

राजस्थान आर.टी.ई. पोर्टल - 
राजस्थान आर.टी.ई. पोर्टल राजस्थान राइट टू एजुकेशन (Right to education) ऑनलाइन पोर्टल वेबसाइट निजी स्कूलों में वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की प्रवेश प्रक्रिया को स्वचालित और व्यवस्थित करने के लिए एक वेब आधारित आधारित समाधान है। यह पोर्टल आरटीई कानून के तहत 25% खाली सीटों के लिए प्रवेश को ट्रैक करने और निगरानी रखने में मदद करता है यह वेबसाइट राज्य के 35000 से अधिक निजी स्कूलों को कवर करती है इसलिए निजी स्कूलों शिक्षा विभाग और आम आदमी के मध्य सूचना के अंतर पर पुल की भांति कार्य करता है इस ऑनलाइन सिस्टम की मदद से किसी भी स्कूलों में सीटें सीटों की संख्या प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क की प्राप्ति पूर्ति फॉर्म वितरण और जानकारी अन्य विभिन्न विवरणों के साथ स्कूल में भर्ती छात्रों के विवरण मिल सकते हैं।
Website URL- https://rte.raj.nic.in


हमने आपके लिए अध्याय 4 के सभी नोटस की वीडियो बनाई है आप चाहे तो इन वीडियो को भी देख सकते हैं।
Part-1

Part- 2


आपको ये - RSCIT Book Lesson- 4. (Introduction of Internet "इंटरनेट का परिचय") Notes In Hindi 2019. कैसा लगा। अगर आप RSCIT Book के Other Lessons के Notes पढ़ना चाहते हैं तो, हम RSCIT Book के सभी Lessons के नोट्स आपको प्रदान करेंगे। हम आशा करते हैं की आप इस नोट्स को अपने RSCIT Friends के साथ जरूर शेयर करेंगे।

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Thank u So Much, Have a Nice Day.

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Wednesday, November 28, 2018

11/28/2018 09:39:00 AM

RSCIT Book Lesson- 3. (Exploring Your Computer "अपने कंप्यूटर को जाने") Notes In Hindi 2019.

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RSCIT Book Lesson- 3. (Exploring Your Computer "अपने कंप्यूटर को जाने") Notes In Hindi 2019. 

इस अध्याय के अंदर हम पढ़ेगें हमारे कंप्यूटर के बारे में वह सभी छोटी छोटी जानकारी जो कि हमारे एग्जाम के लिए महत्वपूर्ण है।

नोट :- अगर आप इस RSCIT Notes को वीडियो के माध्यम से समझना चाहते हैं, तो हमने इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में आपके लिए एक अच्छा सा वीडियो भी जोड़ा है। तो अगर आपको वीडियो देख कर पढ़ना आसान लगता है, तो कृपया करके आप वीडियो को इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में जाकर देख सकते हैं।

ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) :
ऑपरेटिंग सिस्टम को हम सिस्टम सॉफ्टवेयर के नाम से भी जानते हैं। और यह हमारे कंप्यूटर को कार्य करने योग्य बनाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा हार्डवेयर सॉफ्टवेयर आदि को कंट्रोल किया जाता है। और दोस्तों ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना हमारा कंप्यूटर नहीं चलता है। 

कंप्यूटर के साथ-साथ ऑपरेटिंग सिस्टम और भी बहुत सारी डिवाइसों के लिए जरूरी होता है। जैसे- कंप्यूटर, मोबाइल डिवाइस, वीडियो गेम, सुपर कंप्यूटर आदि।
कुछ कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण - Microsoft Windows, Mac OS, Linux, Unix etc.
कुछ मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण - Android, Window, IOS, Symbian etc.

➤ कंप्यूटर सिस्टम की संरचना को तीन लेयर में बांटा गया है -
 1. हार्डवेयर - इसके बारे में हम पहले भी बात कर चुके हैं अर्थात लेसन नंबर 2 में हार्डवेयर के अंदर इनपुट और आउटपुट डिवाइस होती है। अगर आपने उस लेसन के नोट्स नहीं पढ़ें तो उनको जरूर पढ़ें। 

2. सिस्टम सॉफ्टवेयर - यह हमारे कंप्यूटर सिस्टम को मैनेज करता हैं। इसे बैकग्राउंड सॉफ्टवेयर के नाम से भी जानते हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम सिस्टम सॉफ्टवेयर का ही हिस्सा होता हैं। 

3. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर - यह ऐसे प्रोग्राम होते हैं। जिनके द्वारा उपयोग करता जी. यू. आई. के साथ आसानी से कार्य कर सकता है। जी. यू. आई. का पूरा नाम - ग्राफिकल यूजर इंटरफेस होती है। अर्थात इन प्रोग्रामओं में ग्राफिक्स, जैसे- इमेज आदि का उपयोग किया जाता हैं। जिसके कारण यूज़र इनको आसानी से समझता है। 

➤ ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य कार्य निमन है :
रिसोर्स मैनेजमेंट (Resource management) - 
अर्थात ऑपरेटिंग सिस्टम मेमोरी को मैनेजमेंट करता है। प्रोसेसर को मैनेजमेंट करता है। डिवाइस को मैनेजमेंट करता है। इसी के साथ-साथ कुछ बेसिक कार्य जो होते हैं। उनको भी मैनेज करता है। जैसे कि कंप्यूटर के अंदर कोई Error है तो उसको ढूंढता है और उसका हल निकालता है। इसी के साथ सिक्योरिटी और प्रोटेक्शन हमें प्रदान करता है। 

एप्लीकेशन और यूजर के बीच इंटरफेस -
ऑपरेटिंग सिस्टम एक उपयोगकर्ता के लिए इंटरफेस की तरह कार्य करता है। 

प्रोग्राम क्रियान्वयन (Program Execution) - 
ऑपरेटिंग सिस्टम, एप्लिकेशन प्रोग्राम और मशीन हार्डवेयर के बीच इंटरफ़ेस की तरह कार्य करता हैं। 


➤ ग्राफिकल यूज़र इंटरफ़ेस (Graphical User Interface) :

कंप्यूटर दो प्रकार के इंटरफेस के साथ काम करता है-
A. ग्राफिकल यूजर इंटरफेस 
B. कमांड लाइन इंटरफेस 

A. ग्राफिकल यूजर इंटरफेस - ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के अंदर पिक्चर्स, आईकॉन वगैरह का उपयोग किया जाता है।  ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के उदाहरण - Microsoft Windows, Mac OS, Linux, etc.

B. कमांड लाइन इंटरफेस - कमांड लाइन इंटरफेस के अंदर ओनली टेक्स्ट यानी कि कमांड्स का उपयोग किया जाता है। कमांड लाइन इंटरफेस के उदाहरण - MS-Dos, Unix etc.

ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के लाभ -
ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के साथ हम कंप्यूटर को आसानी से ऑपरेट कर सकते हैं। और कंप्यूटर सीखने में हमें आसानी होती है। और ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के अंदर अलर्ट, माउस मूवमेंट्स, डबल क्लिक अगर होते हैं तो हमें तुरंत पता चलता रहता है। और यह गलतियों को भी जल्दी से डिटेक्ट करता है। इसके साथ काम करना बहुत ही आसान होता है। और अगर आपने एक बार ग्राफिकल यूजर इंटरफेस को सीख लिया तो उसके बाद में आपको दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ काम करना आसान हो जाता है। जैसे मैक ओएस 


ग्राफिकल यूजर इंटरफेस की हानि -
ग्राफिकल यूजर इंटरफेस को अधिक मेमोरी की आवश्यकता होती है। ताकि इमेज इत्यादि डिस्पले करने में देरी ना हो। कुछ दिव्यांगों (जैसे दृष्टि बाधित आदि) को ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के साथ काम करना कठिन होता है। इन्हें काफी दिक्कतें महसूस होती हैं।


विंडोज 10 (Windows 10) :

माइक्रोसॉफ्ट के कुछ विंडोज वर्जन - MS-Dos, Windows 95, Windows NT, Windows 98, Windows ME, Windows XP, Windows Vista, Windows 7, Windows 8, Windows 8.1, Windows 10 (यह 29 जुलाई 2015 को रिलीज हुआ था). 

➤ विंडोज 10 इंटरफ़ेस को समझना : 

1. कंप्यूटर को बूट करना :
कंप्यूटर को स्टार्ट करना और बंद करने की प्रक्रिया बूटिंग कहलाती है। 
बूटिंग दो प्रकार की होती है-
वार्म बूटिंग - कंप्यूटर को रीस्टार्ट करना वार्म बूटिंग कहलाता है। 
कोल्ड बूटिंग - कंप्यूटर को स्टार्ट करना कोल्ड बूटिंग कहलाता है। 

2. डेस्कटॉप एरिया :
जब कंप्यूटर स्टार्ट किया जाता है। और कंप्यूटर के अंदर लॉगइन होने के बाद में जो सबसे पहले स्क्रीन हमारे सामने होती है। उसे डेस्कटॉप कहा जाता है डेस्कटॉप के अंदर स्टार्ट मैन्यू अर्थात स्टार्ट बटन, टास्कबार, वॉलपेपर और आइकंस नजर आते हैं। और इसे आप अपने हिसाब से मैनेज भी कर सकते हो। 
जैसे- डेस्कटॉप का वॉलपेपर चेंज करना, प्रोग्राम को टास्कबार में पिन करना इत्यादि। 

3. टास्कबार :
डेस्कटॉप में सबसे नीचे एक पट्टी होती है। जिसे टास्कबार के नाम से जाना जाता है। इसमें लेफ्ट साइड में स्टार्ट मैन्यू अर्थात स्टार्ट बटन और बिल्कुल राइट साइड में टाइम और कुछ सिस्टम आइकन दिए होते हैं। और जब भी आप कोई प्रोग्राम कंप्यूटर में चलाते हो तो टास्कबार पर उस प्रोग्राम का आइकॉन आपको नजर आएगा। इसके साथ-साथ आप टास्कबार को माउस से ड्रैग करके लेफ्ट, राइट, अप, डाउन में भी सेट कर सकते हो। 

4. आइकॉन :
कंप्यूटर में चलने वाले सभी प्रोग्राम्स के आइकॉन होते हैं। और इन आइकंस पर डबल क्लिक करके आप आसानी से उस प्रोग्राम को ओपन कर सकते हैं या शुरू कर सकते हैं जिसका यह आइकॉन होता है। 

5. सिस्टम ट्रे :
यह टास्कबार के अंदर होती है। टास्कबार में बिल्कुल राइट साइड में जहां पर टाइम शो होता है उसके जस्ट लेफ्ट में, सिस्टम ट्रे होती है। इसके अंदर छोटे-छोटे आईकॉन शो होते हैं जिन्हें आप आसानी से लॉन्च कर सकते हो। 
जैसे स्पीकर वॉल्यूम, वाईफाई, बैटरी स्टेटस आदि। 


6. क्विक लॉन्च आइकन :
यह आइकन किसी प्रोग्राम को जल्दी एक्सेस करने के लिए होते हैं। यह आपको टास्कबार, सिस्टम ट्रे इत्यादि में मिल जाएंगे। 

7. शॉर्टकट आईकॉन :
हम किसी भी प्रोग्राम का शॉर्टकट आईकॉन बना सकते हैं। ताकि हम कहीं से उसमें इन प्रोग्राम को डायरेक्ट लॉन्च कर सकें। शॉर्टकट आईकॉन बनाने के लिए आपको किसी प्रोग्राम के आइकन पर राइट क्लिक करना है और क्रिएट शॉर्टकट ऑप्शन सेलेक्ट करनी है। 

8. स्टार्ट मैन्यू : 
विंडोज 8, विंडोज 8.1 इसके अंदर स्टार्ट मैन्यू नहीं था पर विंडोज 10 में स्टार्ट मैन्यू लाया गया इससे पहले विंडो 7, विंडो XP में स्टार्ट मैन्यू था। और स्टार्ट मैन्यू टास्कबार पर बिल्कुल लेफ्ट साइड में होता है और इसे लॉन्च करने के लिए कीबोर्ड पर भी एक Key होती है। जिसका नाम होता है- Windows Key. इस Key को प्रेस करके आप स्टार्ट मैन्यू को लॉन्च कर सकते हैं। इसके अंदर वह सारे प्रोग्राम होते हैं जो कंप्यूटर को कंट्रोल करते हैं। 

9. मल्टीपल डेस्कटॉप :
अगर आपके पास एक कंप्यूटर है और आप उसी को ही घर पर और ऑफिस में यूज करते हैं तो मल्टीपल डेस्कटॉप आपके लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है। क्योंकि दोस्तों इसके अंदर हम बहुत सारे डेस्कटॉप बना सकते हैं। जैसे कि, होम के लिए अलग और ऑफिस के लिए अलग और बहुत सारे डेस्कटॉप के बीच स्विच करना भी आसान होता है। 

10. माइक्रोसॉफ्ट एज :
विंडोज 10 में इंटरनेट एक्सप्लोरर को माइक्रोसॉफ्ट एज ब्राउज़र के द्वारा रिप्लेस किया गया है। माइक्रोसॉफ्ट एज ऐसा पहला ब्राउज़र है जिसके माध्यम से हम सीधे ही वेब पेज पर नोट लिख सकते हैं। पेज पर हाईलाइट कर सकते हैं। किसी आर्टिकल को ऑफलाइन पढ़ने के लिए सेव कर सकते हैं। 

11. विंडोज स्टोर :
इसके माध्यम से आप विंडो 10 में गेम्स और एप्स डाउनलोड कर सकते हो जैसे कि हम स्मार्टफोन आदि में करते हैं बिल्कुल उसी तरह। 

12. कोरटाना :
विंडोज 10 में यह एक पर्सनल असिस्टेंट है इसे सर्च बॉक्स की तरह इस्तेमाल किया जाता है।


➤ विंडोज 10 बेसिक /एप्लीकेशन यूटिलिटीज :

Windows 10 के साथ कुछ बेसिक /एप्लीकेशन यूटिलिटी आती हैं। -जो कि इसके अंदर इनबिल्ट ही होती हैं। कुछ बेसिक यूटिलिटीज कंप्यूटर डाटा को मैनेज करती है, रिपेयर करती है, और ऑप्टिमाइज करती हैं।
आप इन बेसिक /एप्लीकेशन यूटिलिटी को डेस्कटॉप पर दिए हुए सर्च बॉक्स से सर्च कर सकते हैं।

चलिए अब हम कुछ बेसिक एप्लीकेशन यूटिलिटीज के बारे में जानते हैं -

➧ केलकुलेटर : इसका उपयोग मुख्यतः जोड़, घटाव, गुणा, भाग करने में किया जाता है।

➧ मैथ इनपुट पैनल : इसका उपयोग मैथमेटिक्स प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए किया जाता है। यहां पर आप अपने हाथ से मैथ के कुछ फंक्शन वगैरा लिख सकते हो और इनको वर्ड प्रोसेसिंग में इंप्लीमेंट भी कर सकते हैं।

➧ स्निपिंग टूल : इसका इस्तेमाल मॉनिटर स्क्रीन पर किसी ऑब्जेक्ट का स्क्रीनशॉट कैप्चर करने के लिए किया जाता है। और इस स्क्रीन शॉट को हम सेव करके किसी के साथ सांझा भी कर सकते हैं।

➧ विंडोज मोबिलिटी सेंटर : इसके माध्यम से आप वायरलेस नेटवर्क कनेक्शन स्टेटस, डिस्प्ले और ब्राइटनेस स्पीकर वॉल्यूम आदि को एक ही स्थान पर मैनेज कर सकते हो। इसके कारण हमारा समय भी बच जाता है।

विंडो मोबिलिटी सेंटर में सबसे ज्यादा उपयोग में ली जाने वाली ऑप्शंस -

ब्राइटनेस - ब्राइटनेस के माध्यम से आप कंप्यूटर की चमक जो होती है। उसे बड़ी ही आसानी से मैनेज कर सकते हैं।
➠ वॉल्यूम - यहां पर आप कंप्यूटर स्पीकर के वॉल्यूम को कंट्रोल कर सकते हैं। बड़ी ही आसानी से।
➠ बैटरी स्टेटस - अगर आप लैपटॉप का यूज करते हैं तो यहां पर आपको बैटरी कितने परसेंट चार्ज हो चुकी है, कितना टाइम और लेगी चार्ज होने में या फिर बैटरी कितने समय तक चलेगी। इसकी सारी इनफार्मेशन आपको यहां पर मिल जाएगी।
➠ वायरलेस नेटवर्क - यहां पर आपको बताया जाएगा कि आपका कंप्यूटर वर्तमान में कौन से नेटवर्क के साथ कनेक्ट है।
➠ स्क्रीन रोटेशन - स्क्रीन रोटेशन इसके माध्यम से आप अपने कंप्यूटर मॉनिटर स्क्रीन को पोट्रेट लैंडस्केप और उल्टा-सीधा कर सकते हो।
एक्सटर्नल डिस्पले - इसके माध्यम से आप अपने लैपटॉप या फिर कंप्यूटर को किसी अदर मॉनिटर के साथ जोड़ सकते हो।

➧ पेंट : यह विंडोस के सभी वर्जन में आने वाला प्रोग्राम है। और दोस्तों इस के माध्यम से हम ड्रॉइंग कर सकते हैं। इसी के साथ पिक्चर को मैनेज भी कर सकते हैं। और अगर आप कंप्यूटर चलाते हो तो मेरे ख्याल से आपने यह प्रोग्राम एक बार जरूर चलाया होगा।

➧ सिस्टम टूल : सिस्टम टूल के माध्यम से आप डिस्क पर उपस्थित अनावश्यक फाइलों को डिलीट कर सकते हो इसके अंदर डिस्क को फ्रेग्मेंट करना, सिस्टम की दक्षता को बढ़ाना, डिस्क डिप्रैगमेंटर और डिस्क क्लीनअप टूल होते हैं। जो कंप्यूटर परफॉर्मेंस को अच्छा बनाते हैं।

ये थी विंडोज बेसिक /एप्लीकेशन यूटिलिटीज। 

➤ डायरेक्टरी स्ट्रक्चर / पाथ : 
एक फाइल या डॉक्यूमेंट डाटा का कलेक्शन होता है।
फ्लॉपी डिस्क, ज़िप डिस्क, कॉम्पैक्ट डिस्क, हार्ड डिस्क आदी फाइल को स्टोर कर सकते हैं।
विंडोज, फोल्डर और फाइल को Hierachy या फाइल सिस्टम में रखता है।
फोल्डर के अंदर फोल्डर को सब फोल्डर कहा जाता है। और फोल्डर का दूसरा नाम होता है -डायरेक्टरी अर्थात डायरेक्टरी के अंदर डायरेक्टरी, सब डायरेक्टरी कहलाती हैं।

➧ रीसाइकिल बीन : अगर हम कंप्यूटर में से कुछ डिलीट कर देते हैं, तो वह डिलीट किया हुआ डाटा रिसाइकल बीन में जाकर स्टोर हो जाता है। और दोस्तों अगर हमें उस डाटा की आवश्यकता होती है, तो हम उस डाटा को रीसायकल बीन से रिस्टोर भी कर सकते हैं।

➤ एक अनुप्रयोग या एप्लीकेशन शुरू करना : 
यहां हम उन बेसिक एप्लीकेशन के बारे में बात करेंगे जो कि विंडो के साथ इन-बिल्ट आती हैं।

वर्डपैड - यह माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड की तरह होता है। माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड की अपेक्षा इसके अंदर बहुत ही कम फंक्शन दिए होते हैं। पर इसके अंदर काफी यूजफुल फंक्शन होते हैं।

➠ माइक्रोसॉफ्ट पेंट : यह एक ड्रॉइंग प्रोग्राम होता है। इसके माध्यम से हम पेंटिंग वगैरह बना सकते हैं और उनको अपने कंप्यूटर में सेव करके भी रख सकते हैं।

➠ टाइपिंग प्रैक्टिस : टाइपिंग प्रैक्टिस के लिए हमने नोट्स की वीडियो में बताया हुआ है नोट्स की वीडियो का लिंक आपको बिल्कुल एंड में मिलेगा आप वहां से उसे अवश्य देखें।

➤ एंटीवायरस के द्वारा एक फाइल या फोल्डर स्कैन करना : 
Norton, QuickHeal, Avira, Kaspersky etc. कई एंटीवायरस वर्तमान में बाजार के अंदर उपलब्ध है। जो कि कंप्यूटर का वायरस से बचाव करते हैं। वैसे आपको बता दें एंटीवायरस जो होते हैं। वह हमारे डाटा को वायरस से सेफ रखने के लिए बनाए जाते हैं, और दोस्तों windows10 में एक एंटीवायरस दिया गया है जिसका नाम है - विंडोज डिफेंडर इसके माध्यम से हम अपने कंप्यूटर को आसानी से कर सकते हैं।

हमने आपके लिए अध्याय 3 के सभी नोटस की वीडियो बनाई है आप चाहे तो इन वीडियो को भी देख सकते हैं।
Part-1

Part- 2


आपको ये - RSCIT Book Lesson- 3. (Exploring Your Computer "अपने कंप्यूटर को जाने") Notes In Hindi 2019. कैसा लगा। अगर आप RSCIT Book के Other Lessons के Notes पढ़ना चाहते हैं तो, हम RSCIT Book के सभी Lessons के नोट्स आपको प्रदान करेंगे। हम आशा करते हैं की आप इस नोट्स को अपने RSCIT Friends के साथ जरूर शेयर करेंगे।

LearnRSCIT.com RSCIT Students के लिए हैं। यहाँ वो सब आपको मिलेगा। जिसके कारण आप आपने RSCIT Exam में अच्छे नंबर ला सकेंगे।

Thank u So Much, Have a Nice Day.

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Tuesday, November 27, 2018

11/27/2018 03:28:00 PM

RSCIT ka Agla Paper Kab Hoga?? | RSCIT Exam Date Fix!! | Upcoming RKCL Exam Date 2019 Rajasthan

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RKCL RSCIT Exam Date 2019 Rajasthan
Do you know RSCIT Exam Date 2019 Rajasthan?

If you do not know then it is fine. I will tell you your VMOU RKCL RSCIT Upcoming Exam Date 2019 in Hindi!

Next Date of RSCIT Exam is very near, so we will also tell you How to check the RKCL RSCIT Exam Date in your mobile phone!

Hello RSCIT! 🙋

RSCIT Exam की Online तैयारी करवाने वाली एकमात्र Website (Best RSCIT Website): iLearnRSCIT पर आपका बहुत-बहुत स्वागत हैं! 🙏

आज हम आपको बताएंगे की, RSCIT ka Agla Paper Kab Hoga?

हमारे पास बहुत से RSCIT Students के सवाल आते हैं और उनमे से ज्यादातर में यही पूछा जाता हैं की RKCL ka Exam Kab Hoga? इसलिए आज मैं आपको RSCIT ki Next Exam Date के साथ-साथ ये भी बताऊंगा की RSCIT Exam Date Notification को खुद कैसे देख सकते हैं।

RS-CIT की मुख्य परीक्षा 20 अक्टूबर 2019 माह में होना प्रस्तावित है |
 इन सभी बैचेस की परीक्षा नए सिलेबस पर आधारित होगी | 


RKCL RSCIT Exam Date



Name of Examination : RSCIT (Rajasthan State Certificate In Information Technology)
Exam Conducting Authority : VMOU, Kota
VMOU : Vardhman Mahaveer Open University, Kota
RKCL : Rajasthan Knowledge Corporation Limited

RSCIT Exam Date Fix: October 2019

नोट : आप सभी को सूचित किया जाता है की RS-CIT की मुख्य परीक्षा अक्टूबर 2019 माह में होना प्रस्तावित है |     (इन सभी बैचेस की परीक्षा नए सिलेबस पर आधारित होगी )
RSCIT ka Agla Paper Kab Hoga
RSCIT ka Agla Paper Kab Hoga

How to Check VMOU RSCIT Next Exam Date 2019


RSCIT Ki Next Exam Date Notification देखने के लिए आपको कहीं पर भी जाने के की आवश्यकता नहीं हैं। क्योकि हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारी 100% सही है।

वैसे हम ऑफलाइन RSCIT की Study 2015 से करवा रहे हैं।

हमारे द्वारा आपको कभी भी गुमराह नहीं क्या जायेगा।


इन्हे भी देखें (महत्वपूर्ण लिंक्स) :-

👉 RSCIT Exam Important Questions

👉 RSCIT Online Test in Hindi

👉 RSCIT Complete Study Material (Free)


उम्मीद करते हैं की, हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। इस RSCIT Exam Date की जानकारी को अपने अन्य दोस्तों को भी Share करें।

हम इसी प्रकार से समय-समय पर आपकी मदद करते रहेंगे।

iLearnRSCIT.com एकमात्र ऐसी वेबसाइट हैं जहां पर RSCIT RKCL की अच्छे से तैयारी करवाई जाती हैं। और VMOU RKCL RSCIT की तरफ से आने वाली हर एक अपडेट आप तक पहुंचती हैं।

हमारे साथ जुड़िये हम आपका बहुत अच्छे ख्याल रखेंगे! 😊

फिर मिलेंगे !!

By!!!

Sunday, November 25, 2018

11/25/2018 12:35:00 PM

RSCIT Book Lesson- 2. (Computer System) Notes In Hindi 2019.

RSCIT Book Lesson- 2. (Computer System) Notes In Hindi 2019 :- We Are Share Notes of RSCIT Official Book Lesson No. 2. In Hindi Language, So Read and Get High Marks In RSCIT Exam.

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RSCIT Book Lesson- 2. (Computer System) Notes In Hindi 2019. 

नोट :- अगर आप इस RSCIT Notes को वीडियो के माध्यम से समझना चाहते हैं, तो हमने इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में आपके लिए एक अच्छा सा वीडियो भी जोड़ा है। तो अगर आपको वीडियो देख कर पढ़ना आसान लगता है, तो कृपया करके आप वीडियो को इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में जाकर देख सकते हैं।

कंप्यूटर एक सुचना प्रणाली का हिस्सा हैं।
सुचना प्रणाली पांच भाग हैं - Data, Hardware, Software, प्रोसीजर (Procedure), People.

➤ डाटा (Data): इमेज, टेक्स्ट, वीडियो आदि डाटा होता हैं।
➤ हार्डवेयर (Hardware): कंप्यूटर के वे भाग जिनको हम छू सकते हैं और देख भी सकते हैं। जैसे - मॉनिटर, कीबोर्ड, माउस, स्पीकर, प्रिंटर आदि।
➤ सॉफ्टवेयर (Software): प्रोग्राम्स का समूह अथवा प्रोग्राम्स का दूसरा नाम सॉफ्टवेयर हैं। जैसे माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, पॉवरपॉइंट, एक्सेल आदि।
➤ प्रोसीजर (Procedure): ये वे नियम या दिशा निर्देश होते हैं जिनको पढ़कर हम कंप्यूटर हार्डवेयर - सॉफ्टवेयर को आसानी से उपयोग कर सकते हैं। प्रोसीजर आमतौर पर कंप्यूटर विशेषज्ञों द्वारा लिखे जाते हैं।
➤ लोग (People): कंप्यूटर के द्वारा हम बहतर सामान तैयार कर सकते हैं।

Input Device :- 
वे उपकरण जो डाटा को कंप्यूटर के अंदर ले जाने में हमारी मदद करते हैं इनपुट डिवाइस कहलाते हैं। जैसे - कीबोर्ड, माउस, स्केनर, मइक्रोफ़ोन आदि इनपुट डिवाइस के उदाहरण हैं।

➨ चलिए हम कुछ इनपुट डिवाइस के बारे में बात करते हैं -

1. कीबोर्ड (Keyboard) : यह एक इनपुट डिवाइस हैं। और इसमें लगी Keys को हिंदी में कुंजियाँ कहा जाता हैं। कंप्यूटर कीबोर्ड में-
➔ F1 से F12 तक Function Keys होती हैं। इसके आलावा
➔ !, @, #, $, %, *, ?, :, ", आदि Symbol keys होती हैं।
➔ A to Z : Alphabet Keys.
➔ 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, आदि को Numerical keys कहा जाता हैं।
➔ Num Lock, Caps Lock, Scroll Lock ये तीनो Keys किसी विशेष फीचर को On/Off करने में काम आती हैं इनको Toggle (टॉगल) Keys के नाम से जाना जाता हैं।
➔ Ctrl, Alt Keys को Combination keys के नाम से जाना जाता हैं। क्योंकि इनका उपयोग दूसरी keys के साथ होता हैं। इसलिए इनको कॉम्बिनेशन कीज के नाम से जानते हैं।
इसके आलावा बहुत सारी कुंजियाँ कीबोर्ड में मौजूद होती हैं।
➔ Navigation Keys- Arrow Keys को बोलते हैं। ये चार होती हैं। (←,↑,→,↓)

2. स्कैनर (Scanner) : लेजर तकनीक द्वारा किसी भी दस्तावेज, फोटो आदि को परिवर्तित करके डिजिटल बना देता हैं ताकि दस्तावेज आदि का इस्तेमाल लम्बे समय तक हो सके।

3. मिडी (MIDI) : इसका पूरा नाम Musical Instrument Digital Interface होता हैं। यह एक प्रणाली हैं जो संगीत यंत्रो के बीच डेटा को प्रसार करने में काम आती हैं।

4. मैग्नेटिक इंक करैक्टर रिकोग्निशन (Magnetic Ink Character Recognition) : MICR एक करैक्टर पहचानने की तकनीक हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से बैंकिंग उद्योग में चेक व अन्य दस्तावेजों की क्लीयरिंग करने के लिए होता हैं।

5. ऑप्टिकल मार्क रीडर (OMR) : इसका पूरा नाम - Optical Mark Reader होता हैं। यह एक विशेष प्रकार का स्कैनर होता हैं। इसका इस्तेमाल परीक्षाओ में उत्तर पुस्तिका और OMR Sheet पर बने पेन और पेंसिल के निशानों को पहचान करने में होता हैं। आजकल इसका उपयोग चुनावों और सर्वे में भी होता हैं।

6. ऑप्टिकल करैक्टर रिकग्निशन (OCR) : इसका पूरा नाम Optical Character Recognition होता हैं। इसका उपयोग व्यापक रूप से स्वचालित डाटा एंट्री के लिए किया जाता हैं।

7. बार कोड रीडर (Bar Code Reader) : [BCR] एक होता हैं बार कोड और उस कोड को रीड करने वाला बार कोड रीडर होता हैं। किसी प्रोडक्ट की पहचान के लिए उस प्रोडक्ट पर एक कोड दिया होता हैं। जैसा की आप नीचे इमेज में देख सकते हो इस कोड को रीड करने के लिए बार कोड रीडर का इस्तेमाल होता हैं।
8. स्पीच रिकग्निशन डिवाइस (Speech Recognition Device) : इसके द्वारा कंप्यूटर में ऑडियो इनपुट करवाया जाता हैं जिसके लिए माइक्रोफोन की जरूरत पड़ती हैं।

9. वेबकैम (Webcam) : यह कंप्यूटर से जुड़ा कैमरा होता हैं। जिसके द्वारा हम फोटो और वीडियोस कैप्चर कर सकते हैं।

अभी हम बात करते हैं - Pointing Input Device के बारे में :- 
➭ ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस (GUI), जो बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किये जाते हैं, में स्क्रीन पर कर्सर की स्थिति बताने के लिए पॉइंटिंग डिवाइस की आवश्यकता होती हैं।
➭ ज्यादातर पॉइंटिंग डिवाइस कंप्यूटर से यूएसबी (USB) पोर्ट के माध्यम से जुड़े होते हैं। 
➭ पॉइंटिंग डिवाइस निम्न प्रकार हैं -Mouse, Trackball, Touch pad, Graphical Table, Joystick, Touch Screen Etc.

1. माउस (Mouse) : 
➭ माउस सबसे लोकप्रिय पॉइंटिंग डिवाइस हैं।
➭ माउस User के एक हाथ के साथ कार्य करता हैं। 
➭ पुराने माउस में एक रोलिंग बॉल होती थी, जो माउस के निचले भाग की सतह पर होती थी। 
➭ आजकल ऑप्टिकल माउस का प्रचलन हैं, जिसमे रोलिंग बॉल नहीं होती हैं। 
➭ वर्तमान माउस में रोलिंग बॉल की जगह एक प्रकाश और छोटे सेंसर का उपयोग किया जाता हैं। जो मेज की सतह के छोटे से भाग से माउस की मूवमेंट का पता लगाने में इस्तेमाल किया जाता हैं। 
➭ वर्तमान माउस तार रहित (Wireless) होते हैं, जो रेडियो तरंगो के माध्यम से कंप्यूटर के साथ संचार बनाये रखते हैं। 
➭ माउस में एक स्क्रॉल व्हील (Scroll Wheel) भी होती हैं जो GUI के सतह काम करने में बहुत सहायक हैं। 
➭ पारंपरिक PC (Traditional PC) माउस में दो बटन होते हैं, जबकि मैकिनटोश (Macintosh) माउस में एक ही बटन होता हैं।

2. टच-पैड (Touch Pad) :
वर्तमान में लेपटॉप कम्प्यूटर्स में इसका इस्तेमाल होता हैं। इसकी सतह पर ऊँगली से हम पॉइंटर को गति दे सकते हैं। और इसमें माउस की अपेक्षा कम जगह की आवश्यकता होती हैं।

3. ट्रैक पॉइंट (Track Point) : यह एक छोटे जॉयस्टिक की तरह कार्य करता हैं। इसका इस्तेमाल कर्सर की स्थिति बदलने के लिए करते हैं।

4. ट्रैकबॉल (TrackBall) : यह माउस की तरह होता हैं। इसमें एक बॉल का इस्तेमाल किया जाता हैं।

5. जॉयस्टिक्स (Joystick) :  यह भी एक पॉइंटिंग डिवाइस होती हैं इसका इस्तेमाल गेम्स खेलने में किया जाता हैं।
6. ग्राफ़िक्स टेबलेट (Graphics Tablet) : यह एक टैबलेट के समान दिखाई देती हैं पर इसका उपयोग चित्र बनाने में किया जाता हैं। इस टेबल पर एक विशेष प्रकार के पेन का इस्तेमाल होता हैं।


➨ चलिए हम कुछ आउटपुट डिवाइस के बारे में बात करते हैं -
ऑउटपुट डिवाइस कंप्यूटर में पड़े डेटा को इस रूप में प्रदर्शित करता है ताकि यूजर को आसानी से समझ में आ जाये। उदाहरण - Monitor, Printer, Plotter, Speaker etc.

1. मॉनिटर (Monitor) :- मॉनिटर आउटपुट की सॉफ्ट कॉपी स्क्रीन पर दिखाता है जिससे उपयोगकर्ता आसानी से देख सकता है और समझ सकता है और पढ़ भी सकता है।

आमतौर पर मॉनिटर को दो भागों में बांटा गया है
A. CRT Monitor 
B. Flat Panel Monitor 

A. CRT Monitor : यह टीवी के समान होते हैं इनमें एक बड़ी कैथोड रे ट्यूब लगी होती है।  मॉनिटर का रेजोल्यूशन पिक्सेल में मापा जाता है। पिक्सेल बहुत ही छोटे डॉट्स से बने होते हैं जिन्हें मिलाकर एक पिक्चर बनती है पिक्सेल के बीच की जगह को डॉट पिच कहा जाता है मॉनिटर पर जितने अधिक पिक्सेल होंगे उतनी ही अच्छी पिक्चर की क्वालिटी होगी।

B. Flat Panel Monitor : इसके अंदर दो प्रकार के मॉनिटर होते हैं-
 एक LCD और LED. LCD की Full Form- लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले (Liquid Crystal Display) और LED की Full Form- लाइट एमिटिंग डायोड (Light Emitting Diode) होती है। और यह मॉनिटर CRT मॉनिटर की तुलना में बहुत ही हल्के होते हैं और इन की पिक्चर क्वालिटी भी अच्छी होती है इन मॉनिटर में थिन फिल्म ट्रांजिस्टर Thin Film Transistor (TFT) का उपयोग किया जाता है।

2. प्रिंटर (Printer) : किसी डिजिटल दस्तावेज को कागज पर प्रिंट करना हो तो प्रिंटर का उपयोग लिया जाता है प्रिंटर हार्ड कॉपी प्रदान करती हैं और यह एक आउटपुट डिवाइस होती है प्रिंटर की आउटपुट गुणवत्ता को डीपीआई (Dots Per Inch) में मापा जाता है।

प्रिंटर को मोटे तौर पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है -
A. इंपैक्ट प्रिंटर 
B. नॉन इंपैक्ट प्रिंटर

A. इंपैक्ट प्रिंटर : इसके अंदर कैरेक्टर प्रिंटर और लाइन प्रिंटर मुख्य प्रिंटर होते हैं।

➽ कैरेक्टर प्रिंटर - करेक्टर प्रिंटर के सबसे लोकप्रिय उदाहरण डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर और डेजी व्हील प्रिंटर हैं। डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर के हेड में छोटे-छोटे सक्रिय पिन होते हैं और एक रिबन लगा होता है जिसके सहारे यह इमेज प्रिंट करते हैं। यह प्रिंटर बहुत ही धीमी और बहुत ही शोर करने वाले होते हैं इनका उपयोग आमतौर पर बड़े-बड़े व्यवसाय और व्यापारिक कामकाज में किया जाता है।

➽ लाइन प्रिंटर - लाइन प्रिंटर एक समय में पूरी एक लाइन प्रिंट कर सकते हैं लाइन प्रिंटर के अंदर चैन प्रिंटर और ड्रम प्रिंटर मुख्य हैं। इन प्रिंटर के अंदर भी रिबन का उपयोग किया जाता है। 200 से 2000 लाइन प्रति मिनट इनकी क्षमता होती है।

B. नॉन इंपैक्ट प्रिंटर : यह बिना आवाज किए कार्य करते हैं अर्थात इनकी आवाज होती है वह बहुत ही धीमी होती है। इनके अंदर इंक-जेट प्रिंटर, लेजर प्रिंटर, थर्मल प्रिंटर मुख्य हैं।

➽ इंक-जेट प्रिंटर - यह प्रिंटर किसी इमेज को बनाने या प्रिंट करने में छोटी छोटी बूंदों का छिड़काव करते हैं। और इन प्रिंटर के द्वारा रंगीन चित्र बनाने के लिए भिन्न-भिन्न रंगो की आवश्यकता होती है। यह प्रिंटर सस्ते होते हैं, लेकिन अगर हम इनका लंबे समय तक यूज करें तो इनके अंदर उपयोग होने वाले कार्टेज के कारन ये महंगे पड़ते हैं।

➽ लेजर प्रिंटर - इनका इस्तेमाल कार्यालय और व्यवसायिक तौर पर किया जाता है ज्यादातर लेजर प्रिंटर मोनोक्रोम अर्थात काला रंग प्रिंट करने वाली होते हैं। परंतु यह बहुत महंगें होते हैं, क्योंकि इनके अंदर भिन्न-भिन्न रंग का यूज किया जाता है और यह प्रिंटर इंकजेट प्रिंटर की अपेक्षा अधिक तेज होते हैं। इन प्रिंटरों की गति PPM (पेज प्रति मिनट) में मापी जाती हैं।

➽ थर्मल प्रिंटर - यह प्रिंटर पेपर पर प्रिंट करने में गरम तत्वों का उपयोग करते हैं। इनका इस्तेमाल एटीएम मशीन में रसीद प्रिंट के लिए किया जाता है। और इनके अंदर हिट संवेदनशील कागज (Heat Sensitive Paper) का यूज किया जाता है। इन प्रिंटरों की लागत अधिक होती है।

2. प्लॉटर (Plotter) :- प्लॉटर का उपयोग इंजीनियरिंग के अंदर किया जाता है। जैसे बिल्डिंग प्लान करना, सर्किट डायग्राम बनाने का कार्य प्लॉटर द्वारा किया जाता है।

3. स्पीकर (Speaker) :- यह एक आउटपुट डिवाइस होती है। और यह कंप्यूटर का हिस्सा है। स्पीकर ध्वनि का निर्माण करते हैं और ऑडियो आउटपुट प्रदान करते हैं।

4. मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर (Multimedia Projector) :- सामूहिक रूप से किसी को जानकारी देने के लिए यह डिवाइस बहूत ही मददगार साबित होती है जैसे- मीटिंग, कॉन्फ्रेंस आदि के अंदर प्रेजेंटेशन देने के लिए इस डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है।

➨ कुछ डिवाइस ऐसी होती हैं जो इनपुट और आउटपुट दोनों रूप में कार्य करती हैं। तो चलिए इनके बारे में भी हम पढ़ लेते हैं -

1. फैक्स मशीन (Fax Machine) : इसका इस्तेमाल आज से कुछ टाइम पहले किया जाता था।पर वर्तमान में इसका इस्तेमाल बंद हो चुका है। यह डिवाइस किसी कागज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजती थी जैसे कि इस डिवाइस के अंदर कोई डॉक्यूमेंट डाला जाता था तो यह डिवाइस किसी दूसरे स्थान पर पड़ी हुई फैक्स मशीन के अंदर उस दस्तावेज को प्रिंट कर देती थी तो यह आउटपुट और इनपुट का दोनों का कार्य करती थी।

2. मल्टीफंक्शन उपकरण (MFD Device) : यह उपकरण 2 डिवाइसों को मिलाकर बनाए जाते हैं। जैसे कि आप फोटो में देख सकते हो यह जो मशीन है इसके अंदर तीन कार्य आप एक साथ कर सकते हो जैसे - फोटोकॉपी निकालना, प्रिंट करना और स्कैन करना तो यह होती है मल्टी फंक्शन उपकरण।
MFD Device

3. मॉडेम (Modem) : टेलीफोन लाइन से इंटरनेट की सुविधा प्राप्त करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह डिजिटल सिग्नल को एनालॉग और एनालॉग सिगनल को डिजिटल में परिवर्तित करता है।

इसके अलावा टच स्क्रीन डिस्प्ले, डिजिटल कैमरा आदि इनपुट और आउटपुट डिवाइस के उदाहरण होते हैं।


➨ कंप्यूटर मेमोरी (Computer Memory)- 
कंप्यूटर मेमोरी डेटा और इंफॉर्मेशन स्टोर करने के काम आती है।

कंप्यूटर मेमोरी तीन प्रकार की होती हैं। 
1. कैश मेमोरी
2. प्राइमरी मेमोरी /मुख्य मेमोरी
3. सेकेंडरी मेमोरी

1. कैश मेमोरी (Cache Memory) :  कैश मेमोरी बहुत ही उच्च गति अर्द्ध कंडक्टर मेमोरी होती है जो कि मुख्य मेमोरी की स्पीड बढ़ा देती है। और किसी भी काम को करने में कैश मेमोरी मुख्य मेमोरी की तुलना में कम समय का उपयोग करती है। यह अस्थाई रूप से डाटा को संग्रहित करती है। कैश मेमोरी का मुख्य लाभ यह है कि यह मुख्य मेमोरी से तेज होती है।

कैश मेमोरी की कुछ सीमाएं -
सीमित  क्षमता
बहुत ही महंगी

2. प्राइमरी मेमोरी /मुख्य मेमोरी (Main Memory) : प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर में वर्तमान में जो काम होता है उसे स्टोर करके रखती है। और जब बिजली बंद होती है तो इसमें रखा डाटा खो जाता है। यह मेमोरी अर्धचालक उपकरणों से मिलके बनी होती है जैसे सिलीकॉन आधारित ट्रांजिस्टर । 

 रैम और रोम मुख्य मेमोरी के दो उदाहरण हैं। रैम वोलेटाइल मेमोरी अर्थात परिवर्तनशील और रोम नॉन वोलेटाइल अर्थात अपरिवर्तनशील मेमोरी होती हैं।

मुख्य मेमोरी की विशेषताएं -
यह मेमोरी वर्तमान में कंप्यूटर में हो रहे कार्य स्टोर करती है।
 कंप्यूटर प्राइमरी मेमोरी के बिना नहीं चलता।

 रैम (RAM- Random Access Memory) : [रैम वोलेटाइल मेमोरी अर्थात परिवर्तनशील मेमोरी होती हैं। रेंडम एक्सेस मेमोरी अर्थात RAM कंप्यूटर में किसी डाटा को पढ़ने और लिखने का कार्य इस मेमोरी के द्वारा किया जाता है।

 रैम को भी दो भागों में बांटा गया है -
 डायनामिक रैम (DRAM)
 स्टैटिक  रैम (SRAM)

रोम (ROM- Read Only Memory) : यह मेमोरी नॉन वोलेटाइल अर्थात अपरिवर्तनशील होती है। और बिजली चले जाने के बाद भी इसके अंदर डाटा स्थाई रहता है।
इस मेमोरी के अंदर एक बार डाटा फीड करने के बाद उस डाटा को बदला नहीं जा सकता।

RAM  के निम्न प्रकार होते हैं - 
PROM-  Programmable Read-Only Memory
EPROM- Erasable Programmable Read-Only Memory
EEPROM- Electrically Erasable Programmable Read-Only Memory

3. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) : सेकेंडरी मेमोरी एक्सटर्नल रूप में कार्य करती है। यह मेमोरी नॉन्वोलेटाइल मेमोरी के रूप में जानी जाती है। और यह मुख्य मेमोरी की तुलना में धीमी होती है।
इसका उपयोग स्थाई रूप से और लंबे समय तक डाटा या इंफॉर्मेशन को स्टोर करने के लिए किया जाता है।

सेकेंडरी मेमोरी की कुछ विशेषताएं -
→यह ऑप्टिकल और मैग्नेटिक मेमोरी होती है।
→इसका उपयोग बैकअप मेमोरी के रूप में लिया जाता है।
→बिजली बंद होने के बाद भी यह डाटा को स्थाई रूप से स्टोर रखती है।
→प्राइमरी मेमोरी की तुलना में धीमी होती है।
→बड़े और भारी भरकम डाटा को कम लागत में यह मेमोरी लंबे समय तक रख सकती है।
 जैसे - हार्ड डिस्क (HDD)।

⇒हार्ड डिस्क (HDD) : इसका पूरा नाम हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) होता है। और यह आमतौर पर कंप्यूटर के डाटा को लंबे समय तक स्टोर करने के लिए उपयोग में ली जाती है। इसके अंदर चुंबकीय प्लेट्स होती हैं जिनके ऊपर डाटा संग्रहित किया जाता है।
Hard Disk Drive की अलग-अलग क्षमता होती है जैसे कि 250GB, 500GB, 1TB आदि। इस प्रकार से बहुत सारी HDD मार्केट में उपलब्ध है।

ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) : यह एक वृत्ताकार थाली के समान दिखने वाली होती है। इनकी भी अलग अलग भंडारण क्षमता होती है।
सबसे लोकप्रिय ऑप्टिकल डिस्क - सीडी-आर (CD-R/WORM),  सीडी-आरडब्ल्यू (CD-RW), डीवीडी (DVD), ब्लू रे डिस्क काफी पॉपुलर है।

CD-R / WORM Disk- 
CD-R- Compact Disk Recordable
WORM- Write Once Read Many अर्थात - एक बार इसमें डेटा फीड किया जाता हैं, और उसे बार-बार पढ़ा जाता हैं।

CD-RW-
CD-RW- Compact Disk-Read Write
इसमें फीड किया डेटा हम बार-बार मिटा सकते हैं और उसे दोबारा भी फीड कर सकते हैं।

DVD-
DVD- Digital Video/Versatile Disc
यह दिखने में CD जैसी होती हैं परन्तु इसकी भंडारण क्षमता ज्यादा होती हैं। जैसे - 4.7 GB, 8.5 GB आदि।
डीवीडी को "एकल परत डिस्क" और "डबल परत डिस्क" के रूप में वर्गीकृत किया जाता हैं।

Blu-Ray Disk -
यह डीवीडी की आने वाली पीढ़ी हैं। ब्लू रे डिस्क डेटा स्टोर करने में लेजर बीम का उपयोग करती हैं। इसकी  भंडारण क्षमता 25GB से 50GB होती हैं।

पेन ड्राइव (Pen Drive)/Flash Memory - 
यह एक छोटा सा पोर्टेबल डिवाइस होता हैं। इसका उपयोग भी डाटा स्टोर करने में होता हैं। यह हमेशा कंप्यूटर से जुड़ा नहीं रहता। यह USB पोर्ट (Universal Serial Bus) के माद्यम से कंप्यूटर से जुड़ता हैं। इसे आसानी से कंप्यूटर से अलग किया जा सकता हैं।

स्मार्ट मिडिया कार्ड (Smart Media Card) -
डिजिटल कैमरा में इस्तेमाल में सबसे लोकप्रिय हैं। यह एक पोर्टेबल क्रेडिट कार्ड की तरह होता हैं।

सुरक्षित डिजिटल कार्ड (Secure Digital Card- SD Card) -
यह मल्टीमीडिया कार्ड की दूसरी पीढ़ी हैं। इसमें डेटा को लॉक और सुरक्षित रखने की क्षमता हैं।

ये दो प्रकार के होता हैं -
MiniSD Card
MicroSD Card

हमने आपके लिए अध्याय 2 के सभी नोटस की वीडियो बनाई है आप चाहे तो इन वीडियो को भी देख सकते हैं। 
Part- 1
Part- 2


आपको ये - RSCIT Book Lesson- 2. (Computer System) Notes In Hindi 2019. कैसा लगा। अगर आप RSCIT Book के Other Lessons के Notes पढ़ना चाहते हैं तो, हम RSCIT Book के सभी Lessons के नोट्स आपको प्रदान करेंगे। हम आशा करते हैं की आप इस नोट्स को अपने RSCIT Friends के साथ जरूर शेयर करेंगे।
LearnRSCIT.com RSCIT Students के लिए हैं। यहाँ वो सब आपको मिलेगा। जिसके कारण आप आपने RSCIT Exam में अच्छे नंबर ला सकेंगे।

Thank u So Much, Have a Nice Day. 

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Thursday, November 15, 2018

11/15/2018 03:22:00 PM

Computer Classification | कंप्यूटर वर्गीकरण | RSCIT Notes In Hindi

Computer Classification | कंप्यूटर वर्गीकरण | RSCIT Notes In Hindi :


Computer Classification
1. Classification based on Operating Principles.
2. Classification Digital Computer based on size and Storage Capacity and Performance.

1. Classification based on Operating Principles:- 
 इस प्रकार के कम्प्यूटरों को तीन भागों में बांटा गया हैं।-
A. Analog Computer: ये कंप्यूटर दवाब, ताप आदि के अनुसार कार्य करते हैं। ये कंप्यूटर डॉक्टर्स के पास होते हैं। 
B. Digital Computer: ये कंप्यूटर अंको के आधार पर कार्य करते हैं। ये कंप्यूटर व्यवसाय, घर आदि में काम में लिए जाते हैं। 
C. Hybrid Computer: ये कंप्यूटर Analog और Digital दोनों कंप्यूटर के द्वारा किये जाने वाले काम करते हैं। 

2. Classification Digital Computer based on size and Storage Capacity and Performance:-
इस प्रकार के कम्प्यूटरों को चार भागों में बांटा गया हैं।- (Digital Computer)
A. Super Computer : इनकी भंडारण क्षमता, डेटा प्रोसेसिंग इत्यादि बहुत ज्यादा तेज होती हैं। इनका उपयोग वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता हैं। 
पहला सुपर कंप्यूटर 1964 में बनाया गया।
इसका नाम - CDC 6600 था। 

Super Computer के उपयोग :
मौसम की भविष्यवाणी 
भूकंप की जानकारी 
और संचार इत्यादि। 

हथियारों के परीक्षण और नाभिकीय हथियारों के प्रभावों को जानने वाले कंप्यूटर -
IBM's Sequoia (अमेरिका में)
Fujitsu's K Computer (जापान में)
PARAM Super Computer (भारत में)

B. Mainframe Computer :  काफी महंगे और सरकारी संस्थाओ और बिज़्नेस ऑपरेशन के लिए होते हैं। ये कंप्यूटर बड़े कमरे में रखे जाते हैं। और इनको उचित शीतलन के साथ साथ कुछ और भी चाहिए होता हैं। ये बहुत तेज होते हैं। इनका उपयोग शिक्षण संस्थान और इंश्योरेंस कंपनियों में उनके ग्राहकों के डाटा को रखने के लिए किया जाता है। 
कुछ मशहूर मेनफ्रेम कम्प्यूटर्स -
Fujitsu's ICL VME
Hitachi's Z800

C. Mini Computer :  ये कंप्यूटर छोटे व्यवसाय में उपयोग में लिए जाते हैं। ये सुपर कंप्यूटर जितना शक्तिशाली नहीं होते पर फिर भी ये एक शक्तिशाली मशीन की गिनती में आते हैं।
कुछ मिनी कम्प्यूटर्स के नाम -
K-202
Texas Instrument TI-990
SDS-92

D. Micro Computer :
नार्मल हम अपने आसपास माइक्रो कंप्यूटर ही देखते हैं। और ये काफी अच्छे भी होते हैं।
ये कंप्यूटर 4 प्रकार के होते हैं-
Desktop Computer
Laptop Computer
Tablet PC
Handheld (Smartphone).
11/15/2018 11:39:00 AM

Use of Computer | कंप्यूटर का उपयोग | RSCIT Notes in Hindi 1.4

1.4 Use of Computer :
कंप्यूटर आज लगभग सभी क्षेत्रों में जैसे- शिक्षा, चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशासन, परिवहन, रेलवे, रोडवेज, संचार, व्यापार, मनोरंजन, घर, अस्पतालों आदि में इस्तेमाल किया जा रहा है।

यहां हम निम्नलिखित टॉपिक पर बात करने वाले हैं -

1. घरों में कंप्यूटर का उपयोग 
2. शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग
3. कंप्यूटर का व्यवसाय में उपयोग 


1. घरों में कंप्यूटर का उपयोग :- 

A. स्कूली बच्चों के लिए होमवर्क (Homework for School Children) :
ऐसे बहुत सारे काम होते हैं जो कि स्कूली बच्चे आसानी से कर सकते हैं जैसे कि कोई डॉक्यूमेंट तैयार करना एक्सेल में वर्कशीट बनाना पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन तैयार करना आदि कार्य स्कूली बच्चे आसानी से कर सकते हैं कंप्यूटर के द्वारा अपने घर पर रहकर।

B. मनोरंजन (Entertainment) :
कंप्यूटर के उपयोग से हम मनोरंजन भी बहुत ही आसानी से कर सकते हैं जैसे फिल्में और वीडियो देखना संगीत सुनना कोई कंप्यूटर गेम खेलना या फिर लाइव स्ट्रीमिंग करना यह सारे काम आसानी से कर सकते हैं।

C. सामाजिक मीडिया (Social Media) :
लोग सामाजिक मीडिया उपकरणों का प्रयोग करते हैं जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, और गूगल प्लस आदि का हम उपयोग कर सकते हैं इनसे हम चैट कर सकते हैं और वीडियो चैट भी कर सकते हैं।
D. ज्ञान (Knowledge) :
हम अपना ज्ञान इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे बढ़ा सकते हैं जेसे इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइट उपलब्ध होती हैं जिनमें हम बुक्स वगैरह पढ़ सकते हैं और उन बुक्स को डाउनलोड भी कर सकते हैं तो इस प्रकार हम अपना ज्ञान घर बैठे बढ़ा सकते हैं।

2. शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग :- 

A. स्मार्ट क्लास (Smart Classes) :
आज परंपरागत कक्षाओं को आधुनिक स्मार्ट कक्षाओं में परिवर्तित किया जा रहा है जिसकी हमारी जो कक्षाएं होती है उसके अंदर एनिमेशन, वीडियो, चित्र आदि का उपयोग किया जा रहा है जिसके कारण विद्यार्थियों के लंबे समय तक याद भी रहता है और भी बहुत सारी गतिविधियां है जिनसे हमारी क्लास को स्मार्ट बनाने में कंप्यूटर की अहम भूमिका है।
B. ऑनलाइन शिक्षा (Online Education) :
पहले अगर गांव का विद्यार्थी शहर पढ़ने जाता था तो उसे बहुत ही मुश्किल होती थी और उसका बहुत सारा पैसा बर्बाद होता था पर वर्तमान में ऐसा नहीं है वर्तमान के में आप अपने कंप्यूटर और एक इंटरनेट कनेक्शन के माध्यम से इंटरनेट के द्वारा ऑनलाइन कोई भी कोर्स अपने घर बैठे कर सकते हो।
C. डिजिटल लाइब्रेरी (Digital Library) :
कंप्यूटर के आने से हमारी जो लाइब्रेरी थी जिसके अंदर बहुत सारी किताबें पढ़ी रहती थी अब वो लिब्रेरी पूरी की पूरी डिजिटल हो चुकी है अगर आपको कोई भी बुक्स चाहिए तो आपको इंटरनेट के माध्यम से बहुत ही आसानी से मिल जाती है।
D. अनुसंधान / परियोजनाएं (Research/Projects) :
विद्यार्थी कंप्यूटर के माध्यम से आपने प्रोजेक्ट को आसानी से बना सकता है यानी कि इंटरनेट के होने से उसे किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होती।

3. कंप्यूटर का व्यवसाय में उपयोग :-

A. संचार (Communication) : 
 इंटरनेट के आने से हमारे व्यवसाय के अंदर संचार बहुत ही आसानी से होने लगा है जेस की ईमेल भेजना, SMS भेजना, गूगल हैंगआउट का यूज करना वीडियो कॉल करना यह सभी कार्य होने के कारण हमारे व्यवसाय और भी आसान हो चुका है।
B. बिक्री एवं विपणन (Sales And Marketing) :
पहले व्यवसाय के अंदर अगर किसी को सेल्स और मार्केटिंग करनी होती थी तो वह ऑफलाइन तरीकों को यूज करता था जो कि बहुत ही महंगे होते थे, वे अखबार या फिर दीवारों पर पोस्टर लगाकर अपने सामान की मार्केटिंग करते होते थे और दोस्तों वर्तमान में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वर्तमान के अंदर आप ऑनलाइन मार्केटिंग कर सकते हो जिसे कि डिजिटल मार्केटिंग के नाम से भी जाना जाता है और यह ऑफलाइन मार्केटिंग से भी सस्ती होती है और इसके माध्यम से हम अपने सामान को आसानी से सेल कर सकते हैं विज्ञापनों के द्वारा ऑनलाइन विज्ञापनों के द्वारा।
C. मानव संसाधन (Human Resource) :
 आमतौर पर किसी कंपनी का वित्तीय डाटा संभालने के लिए पहले मनुष्य के द्वारा यह कार्य किया जाता था पर वर्तमान के अंदर ऐसा नहीं है वर्तमान के अंदर कंप्यूटरीकृत बहुत सारे सॉफ्टवेयर होते हैं जो कि फाइनेंस वगैरह को मैनेज करते हैं।
D. शिक्षा और प्रशिक्षण (Education And Training) :
शिक्षा और प्रशिक्षण अगर किसी कंपनी को अपने कर्मचारियों के साथ मीटिंग करनी होती है तो वह बहुत ही आसानी से इंटरनेट के द्वारा कर सकती हैं इसी प्रकार ilearn यानी की शिक्षा भी ऑनलाइन होने लगी है और यह दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। 

Tuesday, November 6, 2018

11/06/2018 10:33:00 PM

RSCIT Book Lesson- 5. (Digital Payments & Platforms "डिजिटल भुगतान और प्लेटफॉर्म") Notes In Hindi 2019.

RSCIT Book Lesson- 5. (Digital Payments & Platforms "डिजिटल भुगतान और प्लेटफॉर्म") Notes In Hindi 2019.  :- We Are Share Notes of RSCIT Official Book Lesson No. 5. In Hindi Language, So Read and Get High Marks In RSCIT Exam.

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RSCIT Book Lesson- 5. (Digital Payments & Platforms "डिजिटल भुगतान और प्लेटफॉर्म") Notes In Hindi 2019.
इस अध्याय में हम पढ़ेंगे ऑनलाइन बैंकिंग क्या होती है, इसके क्या लाभ होते हैं, कौन कौन सी ऐसी सुविधाएं हैं जिनके माध्यम से हम ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ साथ बैंक खाते कैसे खोले जाते हैं, ऑनलाइन या डिजिटल भुगतान पद्धतियां और प्लेटफार्म इत्यादि के बारे में हम जानेंगे।

नोट :- अगर आप इस RSCIT Notes को वीडियो के माध्यम से समझना चाहते हैं, तो हमने इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में आपके लिए एक अच्छा सा वीडियो भी जोड़ा है। तो अगर आपको वीडियो देख कर पढ़ना आसान लगता है, तो कृपया करके आप वीडियो को इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में जाकर देख सकते हैं। www.iLearnRSCIT.com

➤ डिजिटल भुगतान और प्लेटफार्म :

ऑनलाइन बैंकिंग -
यह इंटरनेट बैंकिंग, नेट बैंकिंग, ई बैंकिंग, वर्चुअल बैंकिंग के रूप में जाना जाता है। यह एक पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से अलग है। जहां ग्राहक अपनी सेवाओं का उपयोग करने के लिए बैंक शाखा में जाते हैं। इसमें सामान्यतया उपयोगकर्ता आईडी, यूजरनेम, पासवर्ड और ग्राहक सत्यापन के लिए अन्य क्रेडेंशियल शामिल होते हैं। आज एक सुरक्षित वेबसाइट का उपयोग करने के अलावा ट्रांजैक्शन और सुरक्षा बनाने के लिए वित्तीय संस्थानों द्वारा ओ.टी.पी. वन टाइम पासवर्ड (ग्राहक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा गया एक पासवर्ड) का उपयोग किया जाता है।
आमतौर पर यह वित्तीय संस्थान ग्राहकों द्वारा किए गए ट्रांजैक्शन से संबंधित मैसेज और ईमेल ग्राहकों को भेजते हैं।

➧ ऑनलाइन बैंकिंग के लाभ -
  • कहीं भी, किसी भी समय बैंकिंग
  • ट्रांजैक्शन पर कम लागत /समय की बचत
  • बहुत सुरक्षित
  • पैसे तुरंत और सही जगह स्थानांतरित करना
  • घर बैठे बैठे यूटिलिटी बिल भरना 
  • और कई अन्य सेवाओं का लाभ उठाना। 

➧ ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से सेवाएं -
आज वर्तमान बैंक सभी सेवाएं हमें प्रदान कर रहे हैं, कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं निम्न है -
  • आधार प्रमाणीकरण के जरिए बैंक खाता खोलना 
  • अपने खाते की शेष राशि और स्टेटमेंट की जांच करना 
  • अपने खाते से किसी अन्य खाते में धन स्थानांतरित करना 
  • फिक्स डिपॉजिट और अन्य निवेश करना 
  • यूटिलिटी बिल टेलीफोन व मोबाइल बिल, क्रेडिट कार्ड बिल इत्यादि का भुगतान करना
  • चेक बुक के लिए अनुरोध करना, चेक का भुगतान रोकना, अपने क्रेडिट कार्ड/ डेबिट कार्ड आदि को ब्लॉक /अनब्लॉक करना 
  • डेबिट कार्ड की पिन जनरेट करने के लिए अनुरोध। 
 बैंक में खाता खोले जाने की प्रक्रिया - 
वर्तमान में किसी बैंक में खाता खोलना बहुत आसान हो गया है। खाता खोलने से पहले आपको पता होना चाहिए कि आप कौन सा खाता खुलवाना चाहते हो। 
खातों के भी प्रकार होते हैं जैसे- बचत खाता, चालू खाता, आवर्ती खाता आदि। 
अगर आपको खाता खुलवाना हो तो आप अपने नजदीकी बैंक में जा सकते हैं। इस कार्य में बैंक के कर्मचारी आपकी पूरी मदद करते हैं ।

 जनधन खाता : प्रधानमंत्री जन धन योजना भारत सरकार द्वारा अगस्त 2014 में शुरू की गई थी जो कि कमजोर वर्गों के लिए है। 

जनधन खाता खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज निम्नलिखित है -
जनधन खाता खोलने के लिए आपके पास आपका आधार कार्ड होना आवश्यक है और आप के आधार कार्ड में आपका वर्तमान पता होना चाहिए अगर आपके पास आधार कार्ड नहीं है तो आप मतदान पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, नरेगा कार्ड आदि का भी उपयोग कर सकते हैं पर इनके अंदर आपका वर्तमान पता सही होना चाहिए। 

भामाशाह सक्षम बैंक खाता : भामाशाह योजना की पहल 2008 में राजस्थान सरकार द्वारा सीधे लाभ हस्तांतरण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। यह योजना वित्तीय समावेश का एक परिवार आधारित कार्यक्रम है। जहां प्रत्येक परिवार को भामाशाह कार्ड जारी किया जाता है। यह कार्ड बैंक खाते से जुड़ा हुआ है जो परिवार के मुखिया यानि घर की महिला के नाम पर होता है। 

भामाशाह कार्ड बायोमेट्रिक पहचान और कोर बैंकिंग का प्रयोग करता है। भामाशाह कार्ड के माध्यम से कई कैश बेनिफिट का उपयोग किया जाएगा। और उन्हें लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे स्थानांतरित किया जा सकेगा। गैर नगद लाभ सीधे हकदार लाभार्थियों को दिया जाएगा। 


भामाशाह योजना में नामांकन दोनों ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीकों से किया जा सकता है। ऑनलाइन नामांकन e-mitra से या फिर भामाशाह पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। आधार नंबर के साथ भामाशाह नामांकन किया जा सकता है। यदि आधार नंबर नागरिक के पास उपलब्ध नहीं है तो आधार पंजीकरण करवाने और अपडेट करने के लिए चयनित ई मित्र कियोस्क पर सुविधाएं उपलब्ध हैं। 

ऑनलाइन या डिजिटल भुगतान पद्धतियां और प्लेटफार्म -
एक डिजिटल भुगतान प्रणाली ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की स्वीकृति प्रदान करती है। डिजिटल भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट और कई अन्य भुगतान मोड के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है। भारत में बहुत सारे डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म है। 

 क्रेडिट कार्ड भुगतान : क्रेडिट कार्ड एक छोटा सा प्लास्टिक कार्ड है। यह इलेक्ट्रॉनिक पैसे का सबसे आसान रूप है जो उपलब्ध है और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन भुगतान करना बहुत ही आसान है। 

आप जब इसका भुगतान करेंगे तो  आपके सामने नीचे दी हुई इमेज जैसी विंडो खुलती है।
 क्रेडिट कार्ड भुगतान
क्रेडिट कार्ड भुगतान 
तो आप इसके अंदर नेम और कार्ड नंबर एक्सपायर डेट आदि डालकर अपना अपना योगदान कर सकते हैं इसके अंदर ओ.टी.पी. (One Time Password) की सुविधा भी होती है।

➥ डेबिट कार्ड : डेबिट कार्ड को बैंक कार्ड या चेक कार्ड भी कह सकते हैं। यह एक प्लास्टिक का भुगतान कार्ड होता है। इसका इस्तेमाल खरीदारी करते समय नकदी के बजाय किया जाता है। यह एक क्रेडिट कार्ड के समान है।
लेकिन क्रेडिट कार्ड के विपरीत कोई ट्रांजैक्शन करते समय धन सीधी आपके खाते से ही डेबिट हो जाती है। इसके द्वारा ट्रांजैक्शन करने की प्रक्रिया आप नीचे इमेज में देख सकते हो।
 डेबिट कार्ड
डेबिट कार्ड
आपको अपना कार्ड का नेम अर्थात बैंक का नेम सिलेक्ट करना पड़ता है। कार्ड पर जो नेम है वह नेम एंटर करना पड़ता है कार्ड नंबर एक्सपायरी डेट और सी.वी.वी नंबर जो कि आपके डेबिट कार्ड के पीछे की तरफ होते हैं।

आपको बता दें आप अपना सीवीवी नंबर और डेबिट और क्रेडिट कार्ड के नंबर किसी से भी शेयर न करें क्योंकि आजकल बहुत सारी फ्रॉड कॉल होती हैं जो कि हमारे बैंक अकाउंट से पैसे को उड़ा देते हैं।

डेबिट कार्ड भी ओटीपी का उपयोग करता है। आपको बता दें वर्तमान में जितने भी ऑनलाइन वर्क या फिर ट्रांजैक्शन होते हैं। उनमें ओटीपी का यूज़ होता ही है। और जब हम क्रेडिट या डेबिट कार्ड का यूज़ करते हैं तो, बैंक हमें इसकी जानकारी हमारे मोबाइल पर एसएमएस के द्वारा या फिर ईमेल के द्वारा देता।

➥ रुपे कार्ड भुगतान : RuPay, रुपए और पेमेंट का एक संयोजन है। भारत के राष्ट्रीय भुगतान निगम अर्थात एन.पी.सी.आई - नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा बनाया और लांच किया गया है। यह डेबिट कार्ड का एक भारतीय संस्करण है। यह देश में भुगतान प्रणालियों के एकीकरण के इरादे से बनाया गया है। रुपे कार्ड से भुगतान करने के तरीके डेबिट और क्रेडिट कार्ड के समान ही है।
 रुपे कार्ड भुगतान
➥ नेट बैंकिंग भुगतान : नेट बैंकिंग भुगतान आपके बैंक की इंटरनेट बैंकिंग सेवा का उपयोग करता हैं। भारत में सबसे लोकप्रिय भुगतान विधियों में से एक है। यह डेबिट कार्ड की तरह ही काम करता है जहां हम डेबिट कार्ड के नंबर और नेम डालते हैं वहां पर हमें अपने इंटरनेट बैंकिंग खाते को लॉगइन करना होता है। इसमें भी खरीदारी करने के तुरंत बाद धनराशि हमारे बैंक खाते से काट ली जाती है।

➥ पॉइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.) : पॉइंट ऑफ सेल टर्मिनल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। जिसका इस्तेमाल खुदरा स्थानों पर कार्ड भुगतान प्रक्रिया में किया जाता है। एक पी.ओ.एस. टर्मिनल आमतौर पर सभी तरह के क्रेडिट और डेबिट कार्ड भुगतान की सुविधा देता है इसे आप नीचे पिक्चर में देख सकते हो।
पॉइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.)
पॉइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.)


➥ मोबाइल भुगतान प्रणाली :
मोबाइल भुगतान आमतौर पर मोबाइल डिवाइस से या उसके द्वारा की जाने वाली भुगतान सेवाओं से संबंधित है। ऐसे कई मोबाइल भुगतान सेवाएं हैं, जिनका इस्तेमाल भारत में किया जा रहा है।
जैसे - डिजिटल / मोबाइल वॉलेट, UPI- यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस, BHIM- Bharat Interface for Money, USSD- Unstructured Supplementary Service Data, AEPS- Aadhaar enabled payment system, Micro ATM  इत्यादि।

मोबाइल / डिजिटल वॉलेट : यह एक भौतिक वॉलेट या बटुए का डिजिटल समतुल्य है। जिसमें हम पैसे रख सकते हैं। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। जो उपयोगकर्ता को एक बैंक अकाउंट की तरह पैसा रखने की सुविधा देता है। इस खाते को का उपयोग करने के लिए आपको खाता बनाना आवश्यक होता है। इस मोबाइल वॉलेट खाते में डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन या नकदी के माध्यम से आप पैसे जमा कर सकते हो। और उसके बाद में इस्तेमाल कर सकते हो।
बैंक खाते के माध्यम से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और मोबाइल वॉलेट के बीच मुख्य अंतर यह है। कि बैंकों के विपरीत मोबाइल वॉलेट में ट्रांजैक्शन पर कितनी भी राशि हो, कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। इसके अलावा ग्राहक को हर ट्रांजैक्शन पर अनावश्यक कार्ड विवरण और पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती।
यह आसान और सुविधाजनक है क्योंकि उपयोगकर्ता को सिर्फ खाते में साइन इन कर भुगतान करना होता है।

भारत में कई मोबाइल वॉलेट उपलब्ध हैं। कुछ बैंकों द्वारा और कुछ निजी कंपनी द्वारा चलाए जा रहे हैं

मोबाइल वॉलेट के कुछ उदाहरण - PayTM, SBI Buddy, Freecharge, Mobikwik, PhonePe, Oxygen, M-rupee, PayUmoney, Airtel Money, Jio Money, Vodafone m-paisa, Axis bank lime, ICICI Pockets, SpeedPay etc. 

➲ पेटीएम - इसे आप इसकी वेबसाइट paytm.com से या गूगल प्ले स्टोर से अपने स्मार्टफोन या मोबाइल में डाउनलोड कर सकते हो। डाउनलोड करने के बाद में आपको इसे इंस्टॉल करना पड़ेगा। और इंस्टॉल करने के बाद में एप्स के अंदर आपको रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन के बाद आप पेटीएम अकाउंट को लॉगइन कर सकते हैं। और इसका उपयोग कर सकते हैं।
आप अपने पेटीएम वॉलेट में पैसे जोड़ने के लिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग जैसे किसी भी तरीके का उपयोग कर सकते हैं। पेटीएम में ऐड मनी फीचर का उपयोग करके आप इसमें पैसे जोड़ सकते हैं।
पेटीएम के द्वारा हम ट्रेन, बस, हवाई जहाज, इवेंट टिकट आदि भी बुक कर सकते हैं।

➲ फ्रीचार्ज - फ्रीचार्ज एक ई-कॉमर्स वेबसाइट और मोबाइल वॉलेट है। भारत में प्रीपेड और पोस्टपेड मोबाइल, डी.टी.एच. डाटा कार्ड रिचार्ज करने के लिए ऑनलाइन सुविधा प्रदान करता है। यह एप्लीकेशन हमें चैट और पे सुविधा प्रदान करती है।
यह स्प्लिट बिल जैसी कुछ रोचक सुविधाएं प्रदान करता है। इस एप्लीकेशन को भी आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं और आप अपने मोबाइल नंबर से खुद को पंजीकृत कर इसका उपयोग कर सकते हैं दोस्तों यह पेटीएम से मिलती-जुलती सेवाएं प्रदान करते हैं।

➲ स्टेट बैंक बडी - स्टेट बैंक बडी आपके स्मार्टफोन हेतु स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बनाया गया एक मोबाइल वॉलेट है। यह एक अर्ध-बंद (Cemi-closed) प्रीपेड वॉलेट है, जिसका इस्तेमाल अन्य वॉलेट के उपयोगकर्ताओं और बैंक खातों में कभी भी, कहीं भी पैसा ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
आप स्टेट बैंक बडी को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं और यह एप्लीकेशन हिंदी और इंग्लिश दो भाषाओं सहित उपलब्ध है।
इसका उपयोग करके आप निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं -
पैसे भेजना, अपना विवरण देखना, प्रीपेड मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज करना, अपने बिलों का भुगतान करना, मूवी टिकट बुक करना, ऑनलाइन मर्चेंट भुगतान करना इत्यादि।

➲ यू.पी.आई. (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) - यह प्रणाली NPCI- National Payment Corporation of India (राष्ट्रीय भुगतान निगम) द्वारा विकसित की गई है। UPI एक ग्राहक को बिना क्रेडिट कार्ड विवरण, आई.एफ.एस.सी. कोड या नेट बैंकिंग या वॉलेट पासवर्ड का विवरण दर्ज किए एक बैंक खाते से अलग अलग पारियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान करने की अनुमति देता है।
UPI App को आप आसानी से प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। और इसमें अपना पंजीकरण कर सकते हैं।  इस वॉलेट का इस्तेमाल करने के लिए आपको इसमें M-Pin (Mobile Banking Personal Identification Number) तैयार करना होता है। क्योंकि यह मोबाइल के माध्यम से किसी भी ट्रांजैक्शन के लिए आवश्यक होता है।

➲ BHIM - Bharat Interface for Money - यूपीआई पर आधारित एक एकीकृत भुगतान समाधान एप्लीकेशन है। यदि आपने अपने बैंक खाते पर यूपीआई आधारित भुगतानओं के लिए साइन अप किया है जो आपके मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ है। तो आप डिजिटल ट्रांजैक्शन करने के लिए भीम ऐप का उपयोग करने में सक्षम होंगे। इसमें वह सभी भारतीय शामिल होते हैं। जो तत्काल भुगतान सेवा के आधार पर बने प्लेटफार्म का उपयोग करते हैं। और उपयोगकर्ता को किसी भी दो पार्टियों के बैंक खातों के बीच तुरंत धन हस्तांतरण करने की अनुमति देता है। इसे भी आप प्ले स्टोर से जाकर डाउनलोड कर सकते हैं।

➲ USSD- Unstructured Supplementary Service Data - यह सेवा बुनियादी सुविधा युक्त मोबाइल फोन का उपयोग करके मोबाइल बैंकिंग ट्रांजैक्शन की अनुमति देता है। USSD सेवाओं के लिए आपके पास इंटरनेट कनेक्शन या फिर स्मार्टफोन होने की आवश्यकता नहीं है। यह सेवा आप अपने मोबाइल फोन पर एक संख्या *99#  डायल करके इस्तेमाल कर सकते हैं। जो सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताअों  (TSP -टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर) में एक समान होता है।
मोबाइल स्क्रीन पर प्रदर्शित इंटरएक्टिव मैन्यू से यह सेवा काम करती है। हिंदी और इंग्लिश सहित कई भाषाओं में उपलब्ध है। यूएसएसडी में धन ट्रांसफर करने की एक सीमा होती है। और यह सेल्फ सर्विस मॉड पर चलता है। इसमें ट्रांजैक्शन करने के लिए आपको "मोबाइल मनी पहचानकर्ता" अर्थात MMID (Mobile Money Identifier ) और M-Pin की आवश्यकता पड़ेगी।

USSD पर उपलब्ध सेवाएं-
 बैलेंस पूछना, मिनी स्टेटमेंट, फंड ट्रांसफर, एमएम आईडी जाने, एमपिन बदले, ओटीपी उत्पन्न करें, इत्यादि।

➲ AEPS- Aadhaar Enabled Payment System -  बैंक खाते से धन प्राप्त करने का एक तरीका है। धन प्राप्त करने की यह व्यवस्था ने तो आपके हस्ताक्षर और ना ही डेबिट कार्ड की मांग करती है। यह प्रमाणीकरण के आधार डाटा का लाभ उठाती है। UPI और USSD की तरह यह भारत के राष्ट्रीय भुगतान निगम ( NPCI) की एक और पहल है।
AEPS एक मशीन है जिसे माइक्रो एटीएम भी कहा जाता है। यह मशीन POS मशीन के समान है जो क्रेडिट, कार्ड डेबिट कार्ड स्वीकार करते हैं। इसमें एक मात्र अंतर यह है कि यह मशीन कार्ड के बजाय आपको अपने बायोमेट्रिक (आमतौर पर फिंगरप्रिंट) का उपयोग कर के भुगतान करने की अनुमति देती है।
आप इसे डाउनलोड कर सकते हो।
इसके द्वारा हम- बैलेंस पूछताछ, नगद निकासी, नगद जमा और फंड ट्रांसफर जैसी सेवाएं ले सकते हैं।

➲ गूगल तेज एप : गूगल तेज़ एक मोबाइल पेमेंट सर्विस है, जो भारत के यूजर को ध्यान में रख कर बनाई गई है।  तेज शब्द हिंदी भाषा से लिया गया है, इसका अंग्रेजी में अर्थ होता है, फास्ट। गूगल भारत में प्रयोग किए जाने वाले सभी स्मार्टफोंस को सपोर्ट करता है। इसमें कई भाषाएं इस्तेमाल की जाती हैं।
जैसे - अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, मराठी ,बंगाली, कन्नड़, तमिल, तेलुगू इत्यादि।
गूगल IOS and Android दोनों प्रकार की मोबाइल डिवाइस के लिए उपलब्ध है।
इसका आप आसानी से उपयोग कर सकते हैं।

हमने आपके लिए अध्याय 5 के सभी नोटस की वीडियो बनाई है आप चाहे तो इन वीडियो को भी देख सकते हैं।
Part-1

आपको ये - RSCIT Book Lesson- 5. (Digital Payments & Platforms "डिजिटल भुगतान और प्लेटफॉर्म") Notes In Hindi 2019कैसा लगा। अगर आप RSCIT Book के Other Lessons के Notes पढ़ना चाहते हैं तो, हम RSCIT Book के सभी Lessons के नोट्स आपको प्रदान करेंगे। हम आशा करते हैं की आप इस नोट्स को अपने RSCIT Friends के साथ जरूर शेयर करेंगे।

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